Goat Farming Subsidy Scheme 2026: अपने 2026 बकरी फार्म के सपने को साकार करें, 90% तक की सब्सिडी प्राप्त करें

By Ajay Maurya

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Goat Farming Subsidy Scheme 2026 : अगर आप 2026 में बकरी पालन शुरू करने की सोच रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। महंगाई के इस दौर में “कम लागत, नियमित आमदनी” वाला बिजनेस हर कोई ढूंढ रहा है। बकरी पालन ठीक उसी कैटेगरी में आता है। अच्छी बात यह है कि सरकार भी इस सेक्टर को गंभीरता से सपोर्ट कर रही है। Goat Farming Subsidy Scheme 2026 के तहत केंद्र और राज्य सरकारें 50% से लेकर 90% तक की सब्सिडी दे रही हैं। सही योजना और जानकारी के साथ यह सपना जमीन पर उतर सकता है, वह भी बिना जरूरत से ज्यादा कर्ज के।

Goat Farming Subsidy Scheme 2026 क्या है?

यह कोई नई योजना नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार की National Livestock Mission (NLM) और राज्य सरकारों की पशुपालन योजनाओं का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना, किसानों की आय में स्थिरता लाना और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देना है।
सीधी बात करें तो सरकार चाहती है कि आप बकरी पालें, कमाएं और गांव में ही टिके रहें—शहरों की भीड़ कम हो, यह भी एक लॉजिक है।

सब्सिडी कितनी मिलेगी?

सब्सिडी की राशि यूनिट साइज, राज्य और सामाजिक श्रेणी पर निर्भर करती है।

केंद्र सरकार (NLM) के तहत

  • 50% कैपिटल सब्सिडी बकरी ब्रिडिंग फार्म पर
  • अधिकतम सीमा: ₹50 लाख तक
  • बड़े यूनिट (500 फीमेल + 25 मेल बकरी) पर सबसे ज्यादा लाभ

राज्य सरकारों की योजनाएं

  • सामान्य वर्ग: 25%–50% सब्सिडी
  • SC/ST, महिला और BPL वर्ग: 75%–90% तक सब्सिडी

कुछ राज्यों जैसे हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में SC/ST लाभार्थियों को 90% तक सहायता दी जा रही है। यह लगभग “कम पूंजी में बड़ा सेटअप” जैसा मॉडल बन जाता है।

तथ्य आधारित जानकारी: यह सब्सिडी पैटर्न NLM गाइडलाइंस, राज्य पशुपालन विभाग और NABARD की आधिकारिक रिपोर्ट्स पर आधारित है।

2026 में यह स्कीम लागू रहेगी या नहीं?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है, और जायज़ भी है।
National Livestock Mission की अवधि 2021 से 2026 तक तय है, इसलिए 2026 में यह योजना पूरी तरह लागू रहेगी। राज्य योजनाएं हर साल बजट के अनुसार चलती हैं, लेकिन पिछले तीन वर्षों का ट्रेंड साफ दिखाता है कि बकरी पालन सरकार की प्राथमिकता में है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि बजट सीमित होता है। देर करने पर “फाइल तो पूरी है, पर पैसा खत्म” वाला जवाब मिल सकता है।

बैंक लोन और NABARD की भूमिका

अगर आपके पास पूरी पूंजी नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं।

  • NABARD समर्थित बैंक लोन उपलब्ध हैं
  • लोन पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे आपके अकाउंट में एडजस्ट होती है
  • इससे EMI का बोझ काफी हल्का हो जाता है

यही कारण है कि छोटे और सीमांत किसान भी अब 50–100 बकरी का फार्म शुरू कर पा रहे हैं।

आवेदन प्रक्रिया: कहां और कैसे?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन या ऑनलाइन दोनों हो सकती है, यह राज्य पर निर्भर करता है।

सामान्य स्टेप्स:

  1. जिला पशुपालन विभाग से संपर्क
  2. प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना
  3. बैंक से लोन अप्रूवल
  4. सब्सिडी के लिए NLM/राज्य योजना में आवेदन

यह प्रक्रिया सुनने में लंबी लगती है, लेकिन सही गाइडेंस हो तो काम आसान हो जाता है। सच कहें तो फाइलें खुद नहीं चलतीं, लेकिन सही टेबल पर रखने से चलने लगती हैं।

बकरी पालन क्यों है समझदारी भरा फैसला?

  • कम जगह में शुरू हो जाता है
  • चारे की लागत अन्य पशुओं से कम
  • दूध, मीट और ब्रीडिंग—तीन स्रोत से आय
  • बाजार में डिमांड स्थिर रहती है

यही कारण है कि Goat Farming Subsidy Scheme 2026 सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक अवसर बन जाती है।

भरोसेमंद स्रोत (References)

  • National Livestock Mission – Department of Animal Husbandry & Dairying, Govt. of India
  • NABARD – Livestock & Farm Sector Financing Reports
  • राज्य पशुपालन विभागों की आधिकारिक वेबसाइट्स (हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र)

निष्कर्ष

अगर आप 2026 में बकरी फार्मिंग शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह सही समय है। सब्सिडी, बैंक सपोर्ट और सरकारी फोकस—तीनों एक लाइन में हैं। थोड़ा रिसर्च, सही दस्तावेज और समय पर आवेदन आपको उस मुकाम तक पहुंचा सकता है, जहां बकरी सिर्फ पशु नहीं, बल्कि स्थायी आमदनी का साधन बन जाती है।

Ajay Maurya

Ajay Maurya एक समर्पित एजुकेशन ब्लॉगर और UPBoardTopper.com के संस्थापक एवं सीईओ हैं। उनका उद्देश्य है उत्तर प्रदेश बोर्ड के छात्रों तक सटीक, अपडेटेड और परीक्षा में सहायक जानकारी पहुँचाना। वर्षों के अनुभव और गहरी समझ के साथ, वह छात्रों को न सिर्फ टॉपर बनने की राह दिखाते हैं, बल्कि उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं। उनके लेख सरल भाषा, प्रैक्टिकल टिप्स और बोर्ड परीक्षाओं पर केंद्रित होते हैं, जो छात्रों के लिए एक भरोसेमंद संसाधन बन चुके हैं।

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